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प्रिय अहाँ बसल छी शोणित सँ श्वाँस धरि
सब ठाम अहीँ छी आश सँ विश्वास धरि
इ धरती गगन सब कण कण मे अहाँ छी
गीत गजल दुख दर्द गुलाब सँ पलास धरि
प्रिय अहाँ बसल छी शोणित सँ श्वाँस धरि
सब ठाम अहीँ छी आश सँ विश्वास धरि
इ धरती गगन सब कण कण मे अहाँ छी
गीत गजल दुख दर्द गुलाब सँ पलास धरि
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