Saturday, 25 February 2012

.गजल

राति मे हुनकर इयादि आबैए बेसी .
राति मे बाट जोहैत आँखि जागैए बेसी ,
कतबो प्रकृतिक कोरा मे रहब मुदा ,
खण्डहर सिनेहक नीक लागैए बेसी ,
माँ कए चिन्ता जेना संतान लेल होइ छै .
खून नै रग-रग सँ चिन्ता दौगैए बेसी ,
गामक टुटल टाट दोग सँ देखैत ओ ,
पहिलुक मिलनक बात दागैए बेसी ,
कोना-कोना कोहबर सँ कलकत्ता एलौँ ,
रूकबो नै करै फिल्म जेकाँ भागैए बेसी ,
विरहक वेदना झुलसा देलक आत्मा ,
घुरो सँ "अमित" करेज सुनगैए बेसी . . . । ।
अमित मिश्र

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों