Friday, 10 February 2012

गजल

प्रस्तुत अछि मुन्ना जीक गजल--


जे चुबै छै ठोर-आँखिसँ ओकरा ताड़ी बुझू
जँ पीतै केओ संसारमे तँ बरबादी बुझू

आब तँ एहने बिआहक परिपाटी बुझू
लिव-इन-रिलेशन वाली घरवाली बुझू

भाइ जेबीमे घुसल हाथक की महत्व छै
तालसँ ताल मिलए तँ ओकरा ताली बुझू

निराशा संग आशापर टिकल छै दुनियाँ
जँ देखलहुँ भगजोगनी तँ दिवाली बुझू

बहुतों अछि संसाधन देश-परदेशमे
मुन्ना अछि निकम्मा तँ ओकरा मवाली बुझू

आखर-----16

2 comments:

  1. नीक ग़ज़ल मुन्ना जी के.... बड नीक लागल|निराशा आर आशा के मिलान करैत भगजोगनी आ दीवाली के बिम्ब बहुत ही बढ़िया ढंग स उभइर क आयल अछि|

    नीचा मे "आखर-16" के की मतलब भेल ?

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  2. दरअसल इ 16 आखर मने एकटा वैकल्पिक बहर अछि मैथिलीमे वार्णिक बहर जे की वैदिक छंद अछि------ एहि बहरक मतलब छैक मतलाक पहिल पाँतिमे जतेक वर्ण छैक ओहि गजलक आन हरेक शेरक पाँतिमे ओतबए वर्ण हेबाक चाही। उपरमे उदाहरण लेल हम अपन जतेक शेर देने छी ओ सभ सरल वार्णिक बहरमे अछि।तथापि एकटा उदाहरण आर-----
    जहिआ धरि हमरा श्वास रहत
    तहिआ धरि हुनक आस रहत
    आब एकरा गानू। एहि दूनू पाँतिमे 13-13 वर्ण अछि। इ भेल सरल वार्णिक बहर। वर्ण कोना गानल जाए ताहि लेल इ धेआन राखू-----
    हलंत बला अक्षरकेँ 0 मानू
    संयुक्ताक्षरमे संयुक्त अक्षरके 1 मानू। जेना की "हरस्त" मे स्त=1 भेल।
    तकरा बाद सभ अक्षरकेँ 1 मानू चाहे ओकर मात्रा लघु हो की दीर्घ।

    ओना इ गजलक अरबी बहर नै छै तथापि सरलता आ अभ्यासक दृष्टियें एकर प्रयोग कएल जाइत छै।

    अरबी बहर पर आधारित ओमप्रकाश जीक आर गजल सभ भेटत अहाँकेँ एही ब्लाग पर।

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों