Monday, 7 May 2012

गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" सम्मानक ( बाल गजलक लेल ) पहिल चरण बर्ख-2012 ( मास अप्रैल लेल )

हमरा इ सूचित करैत बड्ड नीक लागि रहल अछि जे " अनचिन्हार आखर"द्वारा स्थापित " गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" सम्मानक ( बाल गजलक लेल ) पहिल चरण बर्ख-2012 ( मास अप्रैल लेल ) पूरा भए गेल अछि। मास अप्रैलक लेल नवलश्री "पंकज"जीक एहि रचना के चयन कएल गेलैन्हि अछि। हुनका बधाइ।






बाल गजल



अहि बाटी मे अगबे रोटी चिन्नी संगे-संग दूधो कम
ई बाटी छऊ तोहर भईया ई बाटी नहि लेबौ हम

चोरा-चोरा क चिन्नी फंक्लैं माँ के जा कहि देबौ हम
नञि त एकटा फाँक अचारक दे उताइर क खेबौ हम

खुरलुच्ची बनि लुच-लुच करबैं नानी मोन पड़ेबौ हम
आब जों बिठुआ कटबैं भैया दांते कैट कनेबौ हम

सुन गे बहिना तोरो अहिना कहियो मजा चखेबौ हम
ककरो स जो झगड़ा हेतौ आब नञि तोरा बचेबौ हम

हासिल पड़का जोड़ ने कहियो तोरा आब बतेबौ हम
चलहिन इस्कूल मैडम जी सँ पक्का माईर खुएबौ हम



***►नवलश्री "पंकज"◄***

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों