Wednesday, 2 May 2012

2016 धरि गजलक भविष्यपर चर्चा

हमरा बुझने बर्ख 2016 धरि मैथिलीमे एहन समय एतै जाहिमे जिनका गजल नै लिखए एतन्हि तिनका कवि मानले नै जेतै। हम सही छी या गलत ।
सही
गलत


· · · 24 April at 12:43

    • Abhishek Jha गज़लकार आब भविष्यवाणी सहो कराअ लागला
      इहा थीक मैथली सब सब-किछु भ जाईये...................

      24 April at 13:20 · · 1

    • Umesh Mandal Abhishek Jhaजी, साहि‍त्‍यकारमे भविष्यवाणीक गुण जौं नै होइ तँ दुखद..।
      24 April at 15:00 · · 2

    • Abhishek Jha Umesh Mandal ji मुदा ई दुर्भाग्य जे साहित्यकारक भविष्यवाणी साहित्यक कोनो विधा के ख़तम क रहल अछी
      संभवतः ई हुनकर कुंडा आ खिन्नताक बोध करा रहल अछी
      साहित्यक मे कोनो विधा कहिओ ख़तम नय भा जा रहल अछी

      24 April at 16:42 · · 1

    • Umesh Mandal Abhishek Jhaजी, आषीशजी अपन वि‍चार जइ तरहें स्‍पष्‍ट रूपेँ सबहक सोझा रखला अछि‍ आ आमंत्रि‍क केलनि‍, ताहि‍मे एहन आरोप नै लगबाक चाही। हँ ओहन साहि‍त्‍यकारपर ई आरोप सहज अछि‍ जे ऐ तरहें खुलि‍ क' कहि‍यो जनमानसक बीच नै एलाह। समाजसँ दूर रहि‍ साहि‍त्‍य सृजन करैत रहला।
      24 April at 16:49 · · 1

    • Abhishek Jha Umesh Mandal ji आहां आब आषीशजी क विचार सं हाईट वयक्तिक रूप सं आषीशजी पर आबी गेलों
      एक साहित्यप्रेमीक रूप मे जों रहितों त हुनकर आही सोचक की साहित्यक कोनो विधा पाँच साल मे ख़तम भ जैत तकर आलोचना केरतिआईन

      24 April at 16:58 · · 1

    • Ashish Anchinhar सभ विधा अपना जगह पर नीक छै। आ हम गजलमे काज करैत छी तँए एकर उन्नति लेल सदिखन प्रयासरत छी। जँ किनको एहिसँ दुख छन्हि तँ हम क्षमा चाहैत छी ओना हम सभ गोटासँ आग्रह करबन्हि जे ओ अपना स्तर पर कमसँ कम एकटा विधाकेँ आगाँ जरूर लाबथि। किछु दिन पहिने एक गोटा दुखी मोनसँ लिखने छलाह जे विदेहकेँ गजल गोहि गछाड़ि लेने छै । औ बौआ गजल पर खिसिएलासँ नीक जे अहाँ कोनो मानि लिअ जे कविते के पकड़ू आ ओकरा उठाउ। से तँ करब नै खाली दुखी। रहब। जँ केओ गोटे गजल छोड़ि आन विधा लेल प्रयास रत हेताह आ ओहि विधा लेल अपना अतिरिक्त दस-बीस टा लेखक तैयार करताह ताहिमे हमरो खुशी हएत।....

    • Ashish Anchinhar विद्यापति मैथिल युवा मंच पर आएल ई विचार

      Kamlesh Kishor Jha भाई मानू हमरा कोनों छंद के ज्ञान नई अछि तैयो हमर मोनमे किछ फुरायल जे हम गीति तरीका सं लिखलौ त कि हमरा आहाँ कवी नई कहब.
      about an hour ago · Unlike · 1

      Kamlesh Kishor Jha आ जहां तक हमरा बुझल ई गजल के ता अपने एकटा ब्याकरण छै जे सबहक बुझना में एनाइयो मुश्किल छैक
      about an hour ago · Unlike · 1

      Gangesh Gunjan आ जनिका कविते ने लिख' औतैन आशीष जी, ओ ग़ज़ल कोना लीखि सकैत छैथि ? ग़जल तं
      कविताक एक प्रकार विशेष बा कही जे 'विधा'| तें मूल बात तं ई जे साधना कविताक
      होइत छैक| अपन रूचि आ अवगति सं कवि विशेष 'ग़ज़ल 'क साधना आ अभ्यास क' क'
      उल्लेखनीय बनि जाइत छथि| पाठक समाज ताही रूप मे हुनका समादृत क' दैत अछि|
      मुदा "ग़ज़ल " विधाक प्रति अहांक उत्कट स्नेह आ विश्वास मे कहल गेल ई बात भने
      नीके आशय सं हो, सर्वमान्य भरि सक्के हएत| कारण एहि सिद्धान्तें तं कोनो
      मुक्तवृत्तक श्रेष्ठ कवि कहि सकैत छथि- ' जे कवि मुक्तवृत्त कविता लिखबा मे
      सक्षम नहि से कविए नहि' | हुनका कोन तर्क पर काटल जा सकैये? असल मे कला मात्रक
      विचार मे हमरा जनैत अद्यावधि कोनो तेहन अंतिम सिद्धांत नै बनल जे कोनो एक कला
      विधा कें सर्वश्रेष्ठ प्रतिपादित क' दय| भरिसक तें किछु-२ वर्ख पर सभ भाषाक
      समकालीन विचारक लोकनि मे घमर्थन होइत देखल गेलय जे " सम्प्रत्ति साहित्यक कोन
      विधा साहित्यक केन्द्रीय विधा थिक-कविता, कथा,उपन्यास , नाटक इत्यादि ? ई बात
      यथार्थ जे कोनो खास एक शैलीक कविता काल विशेष मे लोक कें बहुत प्रभावित करैत
      छैक| तें ओ बहुत लोकप्रिय भ' समाज मे पसरि जैत छैक| जेना आइकाल्हि-ग़ज़ल |
      मुदा लोकप्रियतोक अपन 'आयुर्दा' होइत छैक|
      सस्नेह,

      24 अप्रैल 2012 12:44 pm को, Ashish Anchinhar <
      about an hour ago via · Unlike · 1
      ...


    • Ashish Anchinhar भोटिंग रिजल्टसँ हम बहुत बेसी उत्साहित छी। कारण कथा-कविता आदि-आदिकेँ जंगलमे गजल आस्ते-आस्ते तेना ने घुसलै जे पाठक लग अपन अलग स्थान बना लेलक। सभ गजल अनुरागीकेँ धन्यवाद।....

    • Abhishek Jha आषीशजी हमरा ग़ज़ल नहीं आबेये आ हम ई ( ग़ज़ल) बुझबा मे असमर्थ छी
      मुदा हम आन-आन भाषाक ( उर्दू , अरबी, फारसी ,पश्तून, सिन्धी आ आन-आन ) ततैक ग़ज़ल सुनने छी आ एकर महत्व पर सेमिनार देखने छी जे हमरा ई अभाष अछी
      "गज़लक विधा कहीओ ख़तम नय होयत हँ नीक बैजाअ त होईते रहैअ छेअ............................................"

      24 April at 17:44 · · 1

    • Ashish Anchinhar Abhishek Jha----हा-हा-हा-हा....... विरोधाभाषी......... हरेक भाषा केर गजल बुझै छी आ मैथिली केर गजल नै बुझै छी..... औ अभिषेक जी हरेक भाषामे कमोबेश काफिया छोड़ि गजलक नियम एकै होइत छै।... हा-हा.हा....

    • Abhishek Jha humra gazal nay aabaiya.....................
      24 April at 17:49 · · 1

    • Ashish Anchinhar ओना अहाँक भावना बड्ड नीक अछि अभिषेक जी। कविते लिखू।...

    • Ashish Anchinhar Abhishek Jha ---आषीशजी हमरा ग़ज़ल नहीं आबेये आ हम ई ( ग़ज़ल) बुझबा मे असमर्थ छी
      मुदा हम आन-आन भाषाक ( उर्दू , अरबी, फारसी ,पश्तून, सिन्धी आ आन-आन ) ततैक ग़ज़ल सुनने छी आ एकर महत्व पर सेमिनार देखने छी जे हमरा ई अभाष अछी
      "गज़लक विधा कहीओ ख़तम नय होयत हँ नीक बैजाअ त होईते रहैअ छेअ............................................"
      7 minutes ago · Unlike · 1


    • Prabhat Ray Bhatt Uyfm paddya rachna kay mulshrot kavita hoet chhaik
      24 April at 21:31 · · 1

    • Chandan Jha Aan-aan vidha sabh hajaro varkh se achhi..aagan seho rahbe karat..ohi vidha sabh me seho nav-nav lok avait chhaith..avait rahtah...takhan ehi me kono du mat nahi je gajalak ullekhniye sthan bhetat.
      24 April at 21:45 · · 2

    • Ashish Anchinhar ई रिजल्ट हमरा लेल उत्साह जनक अछि। कारण किछुए सही मुदा गजल तँ आबि रहल छै ने लोकक नजरिमे। सभगोटाकेँ धन्यवाद।..


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