Wednesday, 2 May 2012

गजलक इस्कूल भाग-40

जे लोकनि गजलसँ घबराइ छथि तनिका लेल एकटा प्रसाद------------

नमामी शमीशान निर्वाण रूपं

विभू व्यापकम् ब्रम्ह वेदः स्वरूपं

पहिल पाँतिकेँ मात्रा क्रम अछि---- ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ
दोसरो पाँतिकेँ मात्रा क्रम अछि-----ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ

नोट--- दोसर पाँतिमे ब्रम्हकेँ गेबा कालमे बर् = दीर्घकएल जाइत छै।

अरबीमे एहि बहरकेँ बहरे मुतकारिब कहल जाइत छै। जे अज्ञानी लोकनि गजलकेँ आयातित विधा कहैत छथि हुनकर भारतीय ज्ञान बिलकु कम्मे छन्हि।
तँ सूनू ई स्त्रोत आ गजल कमला-कोसीमे डुब्बी मारू।

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों