गुरुवार, 17 मई 2012

गजल


आइ सगरो समाज लागै दलाल छै
पाइ लेल अपनोकेँ करै हलाल छै

रखने रहै अछि मुट्ठीमे माटि नुका
कहि क' सोना बेचबा लेल बेहाल छै

आधुनिक दौड़मे अछि मातल सन
आर्थिक उदारीकरणकेँ कमाल छै

टल्हाकेँ किनैए सोना बुझि लोक सभ
विदेशी ब्राण्ड-नाम पाबिए बेहाल छै

खुलल पोल छलै दलालक जखने
इंटरपोल धरि मचल बबाल छै

तखन सरेण्डर करै तस्कर सभ
कहै छै जे इ देशभक्तिक सबाल छै

भरि लेलक अछि स्विस बैंकक खाता
जोड़ि हाथ कहै गलतीकेँ मलाल छै

आखर---14

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों