Friday, 10 August 2012

गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" सम्मानक ( बाल गजलक लेल ) पहिल चरण बर्ख-2012 ( मास जुलाई लेल )

हमरा इ सूचित करैत बड्ड नीक लागि रहल अछि जे " अनचिन्हार आखर"द्वारा स्थापित " गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" सम्मानक ( बाल गजलक लेल ) पहिल चरण बर्ख-2012 ( मास जुलाई लेल ) पूरा भए गेल अछि। मास जुलाई लेल शिव कुमार यादव जीक एहि रचना के चयन कएल गेलैन्हि अछि। हुनका बधाइ। ऐ आशाक संग जे शिव कुमार यादव जी ओमप्रकाश, अमित जी चंदन जी पंकज जीए सन गजल लिखथि।







बाल गजल


पूर्णिमा मेला ऐलए गे माँ
मेला देखऽ हमहुँ जेबए गे माँ



इस्कुल मे सेहो छुट्टी देलकए गे माँ
दोस-मीत मेलाक ओरिओन कैलकए गे माँ



बड़की दैया के संग लऽ लेबए गे माँ
दाए-बाबा के सेहो कहि देबए गे माँ



गामक कतेक लोक मेला चलतए गे माँ
काका-काकी आ बौआ सेहो तैयार भेलए गे माँ



मेला गाम सँ दुर लगए गे माँ
पैरे-पैर नए, तोरा कोरा मे बैठबए गे माँ



मेला मे बड़ भीड़ लगलए गे माँ
आँगुर तोहर धरने रहबए गे माँ



खुब जतन सँ मेला देखबए गे माँ
"शिकुया" घिरनी-मिठाइ-झिल्ली कीनबए गे माँ

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों