Friday, 17 August 2012

गजल

बाल गजल-१२

माँ गै दुनिया में दू रंगक लोक किएक भगवान बनेलखिन्ह
देव-पितर सभ एक्के तैयो दू रंगक वरदान बनेलखिन्ह


एक्के रंगक पेट देखय छी सभके भूख लगय छइ ओहिना
छुच्छो रोटी लै कियो तरसै ककरो लेल पकवान बनेलखिन्ह

भेटल खिलौना पोथिक संग-संग रंग-बिरंगक अंगा ककरो
ककरो लै बस छिट्टा-खुरपी बाध-बोन-खरिहान बनेलखिन्ह

बखरा सभके एक रंगक छल भगवानो घर भेल दुनेती
ककरो राज भेटल आ ककरो निर्धन के संतान बनेलखिन्ह

एकहिं कलमसँ लीखल विधिना दू रंगक अभिलेख "नवल"
ककरो माटिक ढेपा ककरो मेघक उज्जर चान बनेलखिन्ह

*आखर-२४ (तिथि-१०.०८.२०१२)
पंकज चौधरी (नवलश्री)

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों