सोमवार, 27 अगस्त 2012

गजल


घर घरमे चक्कू पिजाबैत देखलौं
नेनाकेँ तमाकुल चूनाबैत देखलौं   

बेगरता निकालि कs आजुक घड़ीमे
नीक नीककेँ ठेंगा देखाबैत देखलौं

मोनक दोष मोनेमे नूका कs सबटा 
कपटसँ करेज लगाबैत  देखलौं

दियादक फसादमे अपने मोलमे 
घरमे धिया पुता नुकाबैत देखलौं 

पाईकेँ जमाना छै पाईकेँ हिसाबमे 
पानिमे मनुखता डुबाबैत देखलौं

नहि रहिगेल मोल प्रेम आ स्नेहकेँ 
प्रेमकेँ डबरामे बहाबैत   देखलौं

"मनु" मन कोमल सहि नहि सकलौं 
किए माएकेँ नोर खसाबैत देखलौं

(सरल वार्णिक बहर, वर्ण-१४)

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों