सोमवार, 6 अगस्त 2012

गजल

बाल गजल-35

हमरासँ बड दूरे रहै छै चान रे
संगे तरेगण के सजै छै चान रे

धरती बहिन के बिसरि गेलनि गाम के
मामा हमर कोना बसै छै चान रे

भोजन घ'रक नै ओत' शाइद तेँ त' ओ
सब दिन घटै सब दिन बटै छै चान रे

नै दूध पठबै भात पठबै आब नै
पूआ गुड़क नै ने बनै छै चान रे

मामा जकाँ बाबू बसल परदेश मे
टाँफीक बिन नोरो खसै छै चान रे

मुस्तफइलुन
2212 तीन बेर
बहरे- रजज

अमित मिश्र

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों