Sunday, 19 August 2012

गजल

बाल गजल-२

फुरा गेलय जे तकरे टा धुन नीक कथी अधलाह कथी
हँसै-कानय रूसय-मानय ककरो किछु परवाह कथी

भूख प्यासके सुध नै कोनो अनढनके बौआएत रहैछ
खेलक हुरिया सांझ-दुपहरिया छाह कथी आ धाह कथी

छल प्रपंचसँ कोसो दूर भेद नै बूझै अप्पन-अनकर
जे मन भावय सैह पियरगर नेह कथी आ डाह कथी

स्वप्नोंमें जागल सदिखन आ जगलोमें सपनैत रहैछ
अपने जगमें जागल-सूतल सचमें की सपनाह कथी

नेनपन के नै सीमा-बंधन "नवल" मोन उन्मुक्त गगन
बचपन तऽ सचपन के गंगा ऐ बचपनके थाह कथी

*आखर-२२ (तिथि-०४.०४.२०१२)
©पंकज चौधरी (नवलश्री)

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