Wednesday, 1 August 2012

गजल


गजल
कष्ट जखन दुस्सवार होइत छैक
मोन तखने तार तार होइत छैक

अहाँ देखने होयब भोरक पहिने
घनघोर कुप्प अन्हार होइत छैक

आजुक समय बड्ड बदलि गेल छै
मुफ्ते ने किछु सरकार होइत छैक

आइनों बिहूँसि सत्कार करै तखने
रूप जखन होशियार होइत छैक

प्रेम आ स्नेह कि जानै गेल आब लोक
जीवन में कि बारम्बार होइत छैक

कहै राजीव कष्ट त दुःख ला ने थिक
साती मोनक ने सम्हार होइत छैक
(सरल वार्णिक वर्ण-१४)
राजीव रंजन मिश्र

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों