Wednesday, 15 August 2012

गजल

-39

हमर गामक लोक सुनऽ बनबै गबैया
ता धिनक धिन आइ तूँ हूँ करबऽ भैया

हमहुँ जानै छी अलापक भेद सबटा
गीत सुनि तूँ केलऽ झूठे बाप दैया

पोखरिक मोहारपर अभ्यास करबै
कोइली आ गाछ मिल बनतै नचैया

आइडल मे जीतबै आ नाम करबै
देश परदेशसँ बुझलऽ एतै बधैया

फिलम मे गेबै हिरो मिथिलाक बनबै
गजल लिख देतै "अमित" शाइर रचैया

फाइलातुन[2122] तीन बेर
बहरे-रमल

अमित मिश्र

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों