Tuesday, 6 March 2012

हजल

‎कनियाँ कए मारि सँ सब त्रस्त भेल छै ,
हकमि चलै जेना भेकम भेल रेल छै ,
चारि बजे भोरे पानि उझलि उठाबथि ,
भ' जाइ छी स्टार्ट बुझू पानि नहि तेल छै ,
चाहक जोगार एगो दोसर हाथ झाड़ू ,
किचेन कए काज सँ कहू कोन मेल छै ,
स्कुलक दौड़ा सँग सब्जी ,बैँक ,बजार ,जेबै ,
जीनगी लागै यै ओलंपिक कए खेल छै ,
होइ साफ झाड़ू सँ बेलनाक मारि खाइ ,
गर्दन पर छै कैँची घर बुझू जेल छै ,
नैहर कए धमकी आतंकी जेकाँ लागै ,
बम बलास्ट सन बाजब ,जान गेल छै ,
पिबै छी जहर मुदा बचा लै यै ब्रत क' ,
लोकल ट्रेन जेकाँ जीनगी ठेलम-ठेल छै ,
लिखै छी प्रेमक गजल ओकरे डर सँ ,
कंठ पर चढ़ि लिखेलक वैह देल छै ,
मर= चाहै छी भाई मदद करू बताबू ,
"अमित" कत= लागल मृत्यु कए सेल छै . . . । ।
अमित मिश्र

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों