Wednesday, 21 March 2012

गजल





( चंदन जीक ई गजल " मिथिला दर्शन" क अंक जुलाइ-अगस्त २०१२मे प्रकाशित भेलन्हि अछि।)





एखन राति कटै छी हम कनिते-कनिते,

एखन दिन बीतै पहर गनिते-गनिते ।

लगै अछि ई जीवन अकारथ, अचानक,


बिसरलहु गामो शहर तकिते-तकिते ।

पहुँचलहु ने जानी कोना एहि चौबटिया,


बिसरलौ ठेकाना कखन चलिते-चलिते ।

कहाँ कऽ सकलियइ एकचारी हम ठाढ़ो,


बिकेलइ घरारी महल बन्हिते-बन्हिते ।

कही कोन कथा आओर सुनायब की पाँति,


शब्दहुँ हेराओल गजल पढ़िते - पढ़िते ।

नियति केर फेरा मे ओझरायल ''चंदन",


छिड़ियेलै सपना पलक मुनिते-मुनिते ।


-----वर्ण-१६-----

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों