रविवार, 25 मार्च 2012

गजल


गजल-१७

घोघ हुनकर उतरि गेलै,
जोत सगरो पसरि गेलै ।

बहल पुरबा जखन शीतल,
आँचर तखने ससरि गेलै ।

देखि हुनकहि ठोढ़ लाली,
आगि छाती पजरि गेलै ।

नैन लाजे हुनक झूकल,
अटकि हमरो नजरि गेलै ।

रूप यौवन निरखि "चंदन"
मोन मधुकर मलरि गेलै ।

I-U-I-I+I-U-I-I

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों