गुरुवार, 29 मार्च 2012

गजल

बाल गजल






कुकरुकू जखन मुरगा बाजल,
किरिण सुरूजक मूँह मेँ लागल ।

कौआ डकलक कोइली बाजल,
आँखि मिड़ैते चुनमुन जागल ।

नहा-सोना के कयलनि जलखै,
इसकुल गेलथि घंटी बाजल 

दीदीजी बड्ड नीक लगैत छन्हि,
मास्टर जी के छड़ी लय भागल ।

कान पकड़ि के उठक-बैठक,
तैयो खेले पर मोन छै टाँगल ।

"चंदन" टन-टन घंटी बजलै ,
छुट्टी भेलइ घर दिस भागल

-----वर्ण-१३-----

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों