Friday, 2 March 2012

गजलक इस्कूल भाग-19

देहमे सटलै जखन देह सिहरि गेलै देह----26/2/12
· · · Sunday at 00:43 via Mobile
    • Rahul Dill Yadav ‎100% true,
    • Amit Mishra sihair ya sihari ucharan hoe chhai
    • Ashish Anchinhar सिहरि
      Sunday at 00:48 via Mobile · · 1
    • Rahul Dill Yadav Sudh maithali sihari,,,thethi sihair,,
      Sunday at 00:51 via Mobile · · 1
    • Gajendra Thakur सिहरि ekar uchcharan सिहैर hoi Chhai
    • Ashish Anchinhar उच्चारण हरेक ठामकेँ तँ अलग होइ छै मुदा लिखित रुप एक हेइ तँ नीक
      Sunday at 00:55 via Mobile · · 2
    • Krishna Kumar Jha actually mithilakshar me sihair likhnai possible chhaik kintiu Devnagri me ekra Sihari likhal jaait chhaik...
    • Gajendra Thakur देवनागरी (हिन्दी मे) जे लिखल जाइ छै से बाजल जाइ छै, मुदा अपवाद छै "ह्रस्व इ", मुदा मैथिलीमे सेहो अपवाद बेसी ठाम नै छै। "ह्रस्व इ" लिखलो पहिने जाइ छै आ हिन्दी जकाँ बादमे नै पहिनहिये बाजल जाइ छै। जेना सिहरि- मे "सि" मे ह्रस्व इ बाद मे बाजल जाइ छै मुदा रि मे, पहिने, "सिहइर"- एना।
      Sunday at 01:05 · · 8
    • Amit Mishra
      ‎{प्रेम भरल}

      देह मे सटलै जखन देह सिहरि गेलै देह ,
      अंग-अंग फड़क= लागलै लसरि गेलै देह ,

      एकाएक बसंतक हमला भेलै मौसम पर ,
      नव पात भरल गाछ जेकाँ मजरि गेलै देह ,

      जेना आलसी मनुष्य लेल समय नै ठहरै छै ,
      ओहिना कँप-कँपा क' क्षण मे ससरि गेलै देह ,

      साँस मे तेजी ,खूनक प्रवाह बढ़ि गेलै पल मे ,
      लड़ाइ मे ग्यानी पुरूष जेकाँ सम्हरि गेलै देह ,

      भाइ डर सँ नै खुशी मे सिहरल देह बुझू ,
      शनी कए प्रकोप हटल से उचरि गेलै देह ,

      पहिलुक बेर सिनेह मे एहने सन होइ छै ,
      " अमित" वहशी लोक कए त' उजरि गेलै देह . . . । ।

      अमित मिश्र
      Sunday at 02:10 via Mobile · · 5
    • Amit Mishra
      ‎[ समाजीक]

      देह मे सटलै जखन देह सिहरि गेलै देह ,
      देह किएक आइ देहे देख हहरि गेलै देह ,

      दैवक सब सँ नीक रचना मनुक्खक देह छै ,
      अनेको उपमा सँ सजल से उघरि गेलै देह ,

      देह सँ देह कए छुअन पाप बुझना जाइ छै ,
      पंचतत्वक मिश्रण एते जल्दी बिखरि गेलै देह ,

      नव दुनियाँ मे चलैत-फिरैत मशीन छै लोक ,
      मानवता, प्रेम ,भाइ-चारा बाला मरि गेलै देह ,

      गोर-कारी ,छोट-पैघ , लिंगक नाम पर बाँटल ,
      " अमित" आब कहिया सुनब सुधरि गेलै देह . . . । ।

      अमित मिश्र
      Sunday at 02:20 via Mobile · · 5
    • ShantiLakshmi Choudhary
      गज़ल ३१
      देह मे सटलै जखन देह सिहरि गेल देह
      केरौ छोड़ि केँ खेसारी से नेह सिहरि गेल देह

      विज्ञापनक युग मे स्त्री देहक होइ बड्ड मोल
      मरैत देखि वात्सल्य सिनेह सिहरि गेल देह

      जीवनक धार मे जाइत रही ओहिना भासल
      सुनि हुंकरैत कोशीक ढ़ेह सिहरि गेल देह

      बन्हटुट्टी बाढ़ि मे दहि गेल धानक बौग-रोप
      बिच्चे खरिहान देखि ई मेह सिहरि गेल देह

      गामघर छोड़ि-छाड़ि लोक परदेस दिस भागै
      परती नै पाबि हरक रेह सिहरि गेल देह

      गामक डीह डावर बेचि शहर चलि एलहुँ
      भेटै तँ चैन बाहरे नै गेह सिहरि गेल देह

      मराठी मानुख कहै पुरबिया, असामी बिहारी
      तहु मे बाँट भदेस-विदेह सिहरि गेल देह

      दस दशक बाद मिथिला कि एहने नै रहतै
      "शांतिलक्ष्मी" केँ छै कुनु नै थेह सिहरि गेल देह

      ....वर्ण १८.......
    • Ira Mallick देहमेँ सटलै जखन देह सिहरि गेलै देह,
      एकहि छनमेँ बिजली जकाँ लहरि गेलै देह।
      एतेक दिन सुनै छलियै इ छियै लाजक गप्प,
      बीतलै जखन अपना पर भहरि गेलै देह।
      Sunday at 23:38 via Mobile · · 3
    • Ganesh Jha bahut sundar...tino apna aap me lajawab...Amitji ke kaushal ke jatek gungan karab kam hoet...gajab ke pratibhashali....
      Sunday at 23:48 · · 2
    • Ashish Anchinhar Ira Mallick--- neek rubai
    • Prabhat Ray Bhatt Uyfm bahut nik aichh sabhk line
    • Gunjan Shree bahut nik amit ji...aa shanti lakshami ji




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