Friday, 20 April 2012

गजल



आइ नौला{पोखरि के नाम} मे माछ चल मारब कने
जाल मच्छरदानी वला फेकब कने

बहुत टिकुला छै खसल गाछी भरल छै
ओकरो झोरी भरि क' चल आनब कने

माछ चटनी खाएब रोटी भात रौ
डोलपाती चल संग मे खेलब कने

छोट बौआ छी पैघ सन छै सोच रौ
आब कखनो संसार नै बाँटब कने

एक छी हम सब एक थारी मे रहब
" अमित" नवका मिथिला अपन माँगब कने

फाइलातुन-मुस्तफइलुन-मुस्तफइलुन
2122-2212-2212
बहरे-हमीम

नौला{पोखरि के नाम}


हमरा बाल गजल लिखनाइ बड कठिन लागैत अछि ,कारण कोनो बच्चा के सदिखन आँखिक सोझा नै देखैत छी जे ओकर मन पढ़ि सकब ।जे लिखै छी सँ मात्र कल्पना । एकटा हमरे शेर छल

कल्पना कते दिन टिकतै दिल सँ कहू
गामक हवा मे साँस ल' गजल लिखू

तेए हमरा लागि रहल जे कल्पना सँ बाल गजल हमरा सँ सम्भव नै अछि ।ओना इ गजल 11 -12 वयस के बच्चा के केन्द्र मे ल' लिखने छी । आब अहाँ सब कहू जे एकरा बाल गजल कहब की वयस्क गजल ।

अमित मिश्र

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों