Monday, 30 April 2012

गजल

खिड़की सँ सीधे देखै छलौँ हम चान
घन तिमिर मोनक छाँटै छलौँ हम चान
हेतै अपन फेरो भेँट ओतै जा क'
तेँ जागि आशा लगबै छलौँ हम चान
दिन भरि समाजक पहरा कतेको नयन
छवि संग तोहर भटकै छलौँ हम चान
लागै तरेगण लोचन पलक झपकैत
बनि मेघ घोघट लागै छलौँ हम चान
शुभ राति फेरो भेटब अमिय नेहक ल'
सब दिन "अमित" नव आबै छलौँ हम चान
मुस्तफइलुन-मफऊलातु-मफऊलातु
{दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ-दीर्घ-दीर्घ-ह्रस्व}
बहरे-सलीम
अमित मिश्र

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों