Sunday, 8 April 2012

गजलक इस्कूल भाग-32

आब काज खतम भेल हमर
· · · 17 March at 04:19 via Mobile
    • Akhilesh Jha Karj kahiyo khatam nai hoit ahank ekhan bahoot baki aich ham sab aas lagane chi.Subhkamna.
    • मिहिर झा आब ख़तम भेल काज हमर
      आब चमकि गेल साज़ हमर
      नव पल्लव अंकुरायल आब
      बांचल नहि कोनो राज हमर
      17 March at 09:50 · · 2
    • Amit Mishra sundar
      17 March at 12:03 via Mobile · · 1
    • जगदानन्द झा 'मनु' सर , क्षमा करब अपनेक काज कहियो ख़तम नहि होयत, मैथिलीक गजलक विकाश यात्रा अपनेक चारू कात घुमि रहल छैक , आ एखन त ई चलनाइये सिख रहल छैक , अहाँक काज तs डेग-डेग पर परत
    • Amit Mishra खतम सब काज भेल हमर ,
      स्वतंत्र मिजाज भेल हमर ,

      कत्तौ जिनगी छलै धधकै ,
      खुशी पर राज भेल हमर ,

      पुरान जँ गाछ मज्जर नव ,
      अपन त' अवाज भेल हमर ,

      सरस पल भेल बड़ दिन पर ,
      सदेह इलाज भेल हमर ,

      सदिखन गजल लिखैत रहब ,
      "अमित" नव साज भेल हमर . . . । ।

      बहरे-वाफिर
    • Vijay Kumar ‎.
      हम भेलौ फ्री आ ख़तम भेल काज हमर !
      आशा अछि जे रहब आब साथ-साथ हम !!
      17 March at 17:26 · · 6

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