Sunday, 8 April 2012

गजलक इस्कूल भाग-24


-- Ashish Anchinhar
दिन राति हुनके सपना
· · · 10 March at 01:09 via Mobile
    • Ashutosh Mishra dil bujhe jinka apna..
    • मिहिर झा दिन राति हुनके सपना
      सपना मे खिलखिल हँसी
      हँसी मे नुकायल सिनेह
      सिनेह से बेचैन करेज
      करेज मे छे अहांक छवि
      छवि अछि सोझाँ राति दिन
      दिन राति हुनके सपना |
    • मिहिर झा गुरुजी से आग्रह जे यदि एहि काव्य विधा के कोनो नाम छैक त बतायल जाओ | समान वर्ण संख्या और पहिलुका पांती के अंतिम शब्द से नवका पांती क शुरुआत |
    • Ashish Anchinhar वाह बहुत नीक एकरा फर्द कहल जाइत छै
    • Anil Mallik gazab Mihir ji....bahut neek lagal apne'k rachana !
    • Ashish Anchinhar मुदा फर्दमे जरूरी नै छै हरेक पाँतिक अन्तिम शब्दसँ दोसर पाँतिकेँ शुरुआत होइ
    • Ashish Anchinhar आ हरेक पाँतिक काफिया बिलकुल अलग होइक तखने फर्द हेतै
    • Amit Mishra राति -दिन हुनके सपना ,
      बंद आँखि सँ होइ कल्पना ,

      बोली ,फूल बरसै ,गमकै ,
      प्रेम भरल घर -अंगना ,

      कैनवास पर फोटो जेकाँ ,
      आधा-अधुरा होइ सामना .

      कोनो रोक नै जोर चलैए ,
      मात्र ओ छथि के करत मना ,

      घुमै छी दोसर नगर मे ,
      नैन मिलेने फाँकैत चना ,

      कहै यै आलसी इ दुनियाँ ,
      राति-दिन हुनके सपना . . . । ।

      अमित मिश्र
    • मिहिर झा तकैत आन्खि एके सपना
      दिन राति हुनके सपना

      जागल नीन मे कोन फर्क
      मस्ती मे छी देखते सपना

      एक बेरक भेंट अहां सों
      मोन बसल सच्चे सपना

      यथार्थक मरिया ठोक मे
      उत्साह छै हुनके सपना
    • Amit Mishra sundar rachna mihir ji . . . . Neke sapna
    • ShantiLakshmi Choudhary गजल ३४

      दिन राति हुनके सपना
      हा मीत पिरीत अरपना

      उमरल पल गंगाजल
      आँखि बसल छवि-कल्पना

      सुनिच्छल सुमनमोहन
      सुजन मीत मनरंजना

      चौअन्नी सुमुसकी कुटील
      चीर रहल मन वेदना

      हा हा हँसी कलकल स्वर
      सुगल्पगुच्छ अतिरंजना

      हा मीत ई अकाल विरह
      "शांतिलक्ष्मी"क नत बंदना

      ........वर्ण १०.....
    • Amit Mishra sundar gajal

No comments:

Post a Comment

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों