Friday, 6 April 2012

गजल


बाल-गजल-५




साँझ परल, बैसि पिपर पर चिड़ै करय पंचैती,
सूगा-मैना ब्याह रचाओत बगुला करय घटकैती ।

फुदकि-फुदकि के फुद्दी नाचय फेर हेतै वनभोज,
कौआ पिजबैछ लोल कोइली गाबि रहल छइ चैती ।

बगरा-परबा अपस्याँत अछि इंतजाम मे लागल,
डकहर बैसल सोचि रहल कोना हेतै कुटमैती ।

पोरकी पिपही बजा रहल छै टिटही पिटै ढोलक,
मोर नचैछै ता-ता-थैया "चंदन" अद्भुत ई कुटमैती ।


-----वर्ण-२०-----

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों