Saturday, 14 April 2012

गजल

बाल गजल


भोरे-भोरे मुर्गा बाजै छै
सोना बौआ के उठाबै छै

नबकी बाछी दूध देतै
तीरो कक्का दूध दूहै छै

माँ देलनि चुसनि भरि
गुटुर-गुटुर पीबै छै

दूये दाँत के हँसै बौआ
आ हपकुनियाँ काटै छै

भरल कठौत पानि मे
बौआ नहाइ छै कूदै छै

पाउडर काजर ठोप्पा
नव कपड़ा चमकै छै

हाथी घोड़ा आ झुनझुना
"अमित" बौआ बजबै छै



वर्ण-9

अमित मिश्र

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों