Monday, 9 April 2012

गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" सम्मानक ( बाल गजलक लेल ) पहिल चरण बर्ख-2012 ( मास मार्च लेल )

हमरा इ सूचित करैत बड्ड नीक लागि रहल अछि जे " अनचिन्हार आखर"द्वारा स्थापित " गजल कमला-कोशी-बागमती-महानंदा" सम्मानक ( बाल गजलक लेल ) पहिल चरण बर्ख-2012 ( मास मार्च लेल ) पूरा भए गेल अछि। मास मार्चक लेल रूबी झा जीक एहि रचना के चयन कएल गेलैन्हि अछि। हुनका बधाइ।




बाल गजल

हे रौ बौआ तों एना रुसल छेँ किए
दूध-भात लेल तों बैसल छेँ किए



रे तोरा तँ खुएबौ कोरामे सुतेबौ
माएके दूध लेल अरल छेँ किए



कीनि देबौ लाल गेन आ घुरकुन्ना
छोड़ ने जिद्दपन डटल छेँ किए



आबो दहुन बाबा के देथुन्ह पेरा
पेरा सन नीक की नठल छेँ किए



कहबै नाना के देथुन्ह धेनु गैया
आबो बड़ेरीपर चढ़ल छेँ किए

वर्ण-१३

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों