Saturday, 29 September 2012

गजल

प्रस्तुत अछि मुन्नी कामत जीक  आजाद गजल



मुदत्ते बाद महफिलसँ मुँह झाम निकलल
बेकार छल निकलल जेना काम‍ निकलल

हरा गेल भीड़मे आबि कऽ ताकी निङ्गहारि
नतीजा जे छलै निकलबाक सरे-आम निकलल

छिन गेल सरताज हमर खाली माथ हँसोथी
बेबस बनि लाचार शर्मसार अवाम निकलल

फेर सत्तामे अबैक उम्मीद नै एक्को रती
घुरब नै फेर आइ ओ देने पैगाम निकलल

सच तँ ई अछि राजनीतिमे दाग लागल
मुन्नी अपनेे करमसँ कत्लेआम निकलल

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों