शनिवार, 29 सितंबर 2012

गजल


प्रस्तुत अछि जगदीश प्रसाद मंडल जीक  गजल



ठोरक रूप देखैत चलल छै घुरत कोना
मुँहक हँसी सेहो बिसरल छै घुरत कोना

सूर-तान भजैत चलल ककरा की कहतै
छाती केना दलकि‍ रहल छै घुरत कोना
मुँहक कननी केहेन अबै छै कूही भए कऽ
ठोरक रूप जेना बदलल छै घुरत कोना

जि‍नगी जेकर जेहेन रहै छै घुरछी लेने
छाती तेहने तेकर बनल छै घुरत कोना

हलसि‍---कलशि‍ कहैत रहै बीच सड़कपर
एेना पारदर्शी बनि बेकल छै घुरत कोना

एक्कभग्गू शीशा रहतै हँसी केहेन एतै यौ
देखि‍-सूनि ‍‍हँसि डेग उठल छै घुरत कोना

पालि‍स लगिते शीशा झल अन्हा र जे बनतै
अन्हा्रेमे जगदीश बढ़ल छै‍ घुरत कोना

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों