Wednesday, 4 April 2012

गजल

अहांक मोनक बात कहब हम अपन गीत मे
अपन नोरक बाट जोहब हम अपन गीत मे

मोर पान्खि सहलाय विस्मृत नचैत मोरनी सन
देख मुदित मुस्कान हँसब हम अपन गीत मे

भोरुकबा लाली सों रंगल गाल नैना राति रुकल
अध्भुत संधिक रूप रचब हम अपन गीत मे

बढैत अन्हारक सन्गहि लुप्त भेल मीतक छाह
भोर हेबाक आशा के ताकब हम अपन गीत मे

होएक आब फाँसी कालापानी वा बारि दैक समाज
मिहिर प्रेम पिहानी लिखब हम अपन गीत मे

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों