शनिवार, 19 मई 2012

गजल

गजल

अपन अपनेके लड़बै छै 
नेत अपने पर डोलबै छै

जे कानै छै देखार भ' जग मे
हँसै वला के वैह कनबै छै

कलमक ताकत जुनि पूछू
हंगामा त' इएह करबै छै

जेकर दिल मे अहाँ बसलौँ
करेजक खून ओ करबै छै

देखाइ नै दै छै जे सूक्ष्म जीव
बिमरियाह वैह बनबै छै

भरोसा करब ककरा पर
भरोसे वला होश उड़बै छै

आत्मा मे परमात्मा बसै छथि
आब आत्मो वेवफा कहबै छै

नै चिन्हार छै जग मे "अमित" 
कोसी माँ अपनेके दहबै छै

वर्ण- 11
अमित मिश्र

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों