शुक्रवार, 27 जुलाई 2012

गजल

बाल गजल


पूर्णिमा मेला ऐलए गे माँ

मेला देखऽ हमहुँ जेबए गे माँ


इस्कुल मे सेहो छुट्टी देलकए गे माँ

दोस-मीत मेलाक ओरिओन कैलकए गे माँ


बड़की दैया के संग लऽ लेबए गे माँ

दाए-बाबा के सेहो कहि देबए गे माँ


गामक कतेक लोक मेला चलतए गे माँ

काका-काकी आ बौआ सेहो तैयार भेलए गे माँ


मेला गाम सँ दुर लगए गे माँ

पैरे-पैर नए, तोरा कोरा मे बैठबए गे माँ


मेला मे बड़ भीड़ लगलए गे माँ

आँगुर तोहर धरने रहबए गे माँ


खुब जतन सँ मेला देखबए गे माँ

"शिकुया" घिरनी-मिठाइ-झिल्ली कीनबए गे माँ

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों