बुधवार, 25 जुलाई 2012

गजल





आइ हमरा निन्न भैए ने रहल अछि
देखि सबके चालि नोर जे बहल अछि

सब हंसय छैक ठठा क लोकक नामे
दोष अप्पन क्यउ देखि नै रहल अछि

कही ककरा मोन केर इ दरद हम
बनि बकड़ा सब दुःख इ सहल अछि

सुति रहल सब भए गेलय अन्हार
राति जागब हम करै के टहल अछि

बाट तकिते दिन भरि बीतल हमर
राति बितय कोना सौंसे जे पड़ल अछि

प्राण रहिते मुदा हम नै हारब हिया
छाती हमरो बड्ड जीवट भरल अछि


(सरल वर्णिक वर्ण-15)



राजीव रंजन मिश्र

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों