Sunday, 22 July 2012

गजल


गजल-१५
धऽ जे नांगरि चलल अगुआएल जाय छै
छलै अगुआ जे सैह पछुवाएल जाय छै
क्षण-दू-क्षण लेल जे काज लसियेलै कोनो
अहिना दिने -दिन आर बसिएल जाय छै
जकरा बूइध में छलईयै वियैधि धेने
आब बुइधिए सँ ओहो खियाएल जाय छै
पहिने दूधो - दही के नञि नपना छलय
आब नापिए क पाइनो पियाएल जाय छै
कंठ लागल धिया मांग अनुचित रहय
बेटा बेचै लय बोगली सीयाएल जाय छै
तौला जाधरि भरल ताऽ तऽ सुरसुर केलौं
आब जोड़ण लै टोल छिछियाएल जाय छै
मूंह देखिये कऽ मुंग्बा बाँटय केर चलन
एत भेटै नै किछु सभ दियाएल जाय छै
मोन सखुआ में लागल कुसंगत के घून
किछु निरोगो जे छल बझियाएल जाय छै
कतउ आंचे नञि छै हेतय इनहोर की
कतौ धधरा ततेऽ जे उधियाएल जाय छै
कामधुन में "नवल" सुध छै ककरो कहाँ
आब जोशक लहरि भंसियाएल जाय छै
--- वर्ण- १६ ---
(सरल वार्णिक बहर)
©पंकज चौधरी (नवलश्री)
(तिथि-२७.०६.२०१२)

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