Thursday, 1 March 2012

गजलक इस्कूल भाग-7


गजलक एकटा पाँति दए रहल छी। जे केओ गोटे साँझ ७ बजे धरि पूरा करताह। हुनका इ पाँति रचनाक रूपमे सौंपि देल जेतन्हि। इ पाँति एना अछि-----

जखनसँ खसल आँचर देखलहुँ हम

सरल वार्णिक बहर----16 अक्षर
· · · 31 January at 14:58

    • Ashish Anchinhar आब हमरा भाष्कर झा जीसँ नीक आशा अछि.

    • जगदानन्द झा 'मनु' जखन सँ खसल आँचर देखलहुँ हम
      तखन सँ सवय कए बिसरलहुँ हम

      होस रहल नै कतय छी कनिको अपन
      आब तं अहीं में पूर्णतय रमलहुँ हम

      दोख आँचरक नै इ खुसनसीबि हमर
      मोन में अहाँ कए अपन बनेलहुँ हम

    • Ashish Anchinhar वाह.....वाह.....वाह.....वाह...

    • जगदानन्द झा 'मनु' अहाँ मानु नै मानु आँचर हमहि राखब
      खसै छै कतेक खसै दियौ ठानलहुँ हम

    • Anand Jha Jakhan s khasal anchar dekhlaun ham
      sab bisarlaun ahi par thamaklaun ham
      jena lagal gagan s chand utari gelay
      ahank chandan badan s gamaklaun ham
      gaal lale aa thorak o kamppan kehan
      dekh naina s apne jurelaun ham
      dudhiya o badan dekh lajayal chaman
      dekhte e diwana banlahun ham

    • मिहिर झा Sringaar Ras ke barkha bha rahal achhi. Vaah Vaah

    • मिहिर झा जखनसँ खसल आँचर देखलहुँ हम
      अभागल छैक ई आँचर कहलहुँ हम

    • Anand Jha Kesh latkal ehan lata ho jehan
      nai e puchhu ki ki bisarlahu ham
      ahan anchar uthayab kona k priye
      sochi atbe fer s samarhlahu ham
      kan ke o bali gajab dha rahal
      jhil san ankhi dekhte pichharlahu ham
      danr patar ehan jehan hirni ke hoy
      bas atbe kahay lel ahan lag sasrlahu ham
      31 January at 16:38 via Mobile · · 2

    • Anand Jha Bhai lokain ham bhag nai l rahal chhi bas sang d rahal chhi karan hamra aabait kichh nai achhi or 16 akshar ke baat chhai tahi chhama karab
      31 January at 16:43 via Mobile · · 1

    • जगदानन्द झा 'मनु' सुकोमल काया बदन सुन्नर चन्दन सँ
      आँचर के बहाने अहाँ के जानलहुँ हम

    • जगदानन्द झा 'मनु' जखन सँ खसल आँचर देखलहुँ हम
      तखन सँ सवय कए बिसरलहुँ हम

      होस रहल नै कतय छी कनिको अपन
      आब तं अहीं में पूर्णतय रमलहुँ हम

      दोख आँचरक नै इ खुसनसीबि हमर
      मोन में अहाँ कए अपन बनेलहुँ हम

      अहाँ मानु नै मानु आँचर हमहि राखब
      खसै छै कतेक खसै दियौ ठानलहुँ हम

      सुकोमल काया बदन सुन्नर चन्दन सँ
      आँचर के बहाने अहाँ के जानलहुँ हम

    • मिहिर झा neek jagadanand ji

    • मिहिर झा जखनसँ खसल आँचर देखलहुँ हम
      टुक टुक तकतहि मूर्छित भेलहु हम
      लोक कहय नारी छैक चिर जीवन धात्री
      ई रूप देखितहि जे निस्प्राण भेलहु हम

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