Thursday, 1 March 2012

गजलक इस्कूल भाग-2


गजलक एकटा शेर दए रहल छी। जे केओ गोटे साँझ ७ बजे धरि पूरा करताह। हुनका इ पाँति रचनाक रूपमे सौंपि देल जेतन्हि। इ शेर एना अछि-----

खूर देलखिन्ह ओ
सोधि लेलखिन्ह ओ

मात्रा क्रम---
दीर्घ-ह्रस्व-दीर्घ केर दू बेर संयोगसँ बनल बहरे-मुतदारिक ।
· · · 13 January at 16:11

    • Vinit Utpal जे बचल, कांख तर मे दबा लेलखिन्ह ओ.
      13 January at 17:32 via · · 3

    • Ashish Anchinhar शेरकेँ पूरा कएल जाए विनीत भाइ.

    • जगदानन्द झा 'मनु' खूर देलखिन्ह ओ
      सोधि लेलखिन्ह ओ

      देख मोका नीक सँ
      चाभि पेलखिन्ह ओ

      माय-बेटा के देखू
      फूट केलखिन्ह ओ

      नीक-नीक साडी में
      फीट भेलखिन्ह ओ

      गाम-गाम घूमी क
      नाम केलखिन्ह ओ

    • Ashish Anchinhar VINIT JI BALA ---खूर देलखिन्ह ओ
      सोधि लेलखिन्ह ओ

      माछ-भात देखि के
      परा देलखिन्ह ओ

      पांच किलो माछ
      सधा देलखिन्ह ओ

      गीत गाबैत-गाबैत
      जमा देलखिन्ह ओ

    • Ashish Anchinhar जगदानंद आ विनीत भाइ दुनू गोटे केँ धन्यवाद। मुदा जाहि मात्रा क्रममे शेर देल गेल अछि तकर पालन हरेक शेरमे आवश्यक तँए आर मेहनतिकेँ जरूरति अछि।


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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों