शुक्रवार, 30 मार्च 2012

गजल

बाल गजल




एकटा एहन नेनाक मनक बात लिखबाक प्रयास केने छी जिनक माँ आब एहि दुनियाँ मे नहि अछि । अहाँ सब पढ़ू आ कहू जे केहन अछि आ की एकरा बाल गजल क'हज जा सकै यै की नहि ?
आइ तारा केर नगरी सँ एथिन माँ ,
अपन कोरा झट द' हमरा उठेथिन माँ ,
खेलबै माँ संग आ रूसबै हँसबै ,
पकड़ि आँङुर गाम-घर मे बुलेथिन माँ ,
थाकि जेबै जखन , भोजन करा हमरा ,
गाबि लोड़ी आँचरक त'र सुतेथिन माँ ,
राम कक्का के परू छैक मरखहिया ,
सुरज के बकरी सँ हमरा बचेथिन माँ ,
हमर संगी संग माँ के घुमै सर्कस ,
आबि घर हमरो सिनेमा ल' जेथिन माँ ,
कत' सँ एलै मेघ कारी इ , अंबर मे ,
"अमित" मन डेराइ यै कखन एथिन माँ . . . । ।
फाइलातुन-फाइलातुन-मफाईलुन
2122-2122-1222
बहरे-कलीब
अमित मिश्र

1 टिप्पणी:

  1. मिहिर झा
    bahut sundar aur marmaantak

    Chandan Jha
    bahut neek

    Jatasankar Choudhary
    Atulniye

    Ashish Anchinhar
    bahut neek gajl ... ehi lel hamra lag shabd nahi achi

    Amit Mishra
    ahan sab gote k abhari chhi

    जगदानन्द झा 'मनु'
    वाह अमितजी , कमाल के गजल आ बिन मएयक बच्चाक मर्म चित्रण ,एक शव्द में Superb

    Anil Mallik
    राम कक्का के परू छैक मरखहिया ,
    सुरज के बकरी सँ हमरा बचेथिन माँ...bahut neek

    Ashutosh Mishra
    wahhhh..Bahut nik..

    Rajeev Singh
    Your creation this time is totally different than normally I read. Emotion of orphan boy has been described by you in fantastic way.

    Amit Mishra
    dhanyawad

    Ritesh Jha
    Bad nik lagal ...

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों