Monday, 28 January 2013

बाल गजल


बाल गजल-१८

बोहनिक बेर छै बटुआ ओरियेने जाएत छल
फुकना लिअ' फुकना लिअ' चिचियेने जाएत छल

सभटा फुकना के फूंकि-फूंकि डोरा लए बान्हि-बान्हि
ओकरा ठेंगामे खोंसि-खोंसि सरियेने जाएत छल

मगन मस्त भेल झूमि-झूमि गामे-गाम घूमि-घूमि
फूलल - फूलल फुकना के उड़ियेने जाएत छल

गहिंकीक बड़ भीड़ छलै नेन्ना सभ अधीर छलै
तइयो सौदा सभसँ धरि फरियेने जाएत छल

अनमन लागैत छैक सींग पुछरी आ पाँखि सन
एना फुकनामे फुकने के सन्हियेने जाएत छल

बेसी नमहर फुलाबयमे फुकना जे फूटि गेलै
ओ मोने-मोन सभके आब गरियेने जाएत छल

एकटा फुकना के फुटलासँ चारि आना छूटि गेलै
रहि - रहिकऽ केश "नवल" कुड़ियेने जाएत छल

*आखर-१९ (तिथि-११.०९.२०१२)
पंकज चौधरी (नवलश्री)

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