Thursday, 31 January 2013

गजल

गजल-2

चंचल चलै बसंत बहि आयल
हर्षित मोन चिहुँक कहि जागल

हुनकर रूप देख मोन व्याकुल
जेना चिड़ैयाँ वाण सहि कऽ घायल

दुख केर देख मनुख किए कानै
मयूर घटा कारियो देखि नाचल

अनकर पीड़ देखि खुश होइ छी
निज दुख मे मनुख किए कानल

चाँदनी कें संग चान बहरायल
"
सुमित" प्रेमक छटा देखि पागल

वर्ण-13
सुमित मिश्र

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों