Monday, 14 January 2013

बाल गजल

बाल गजल-89

कान लेने भागलौ कौआ पकड़ ने
कमसँ कम ई ठेहुनोपर तूँ ससर ने

खाइ छौ छाल्ही चढ़ल चारपर देखें
जोर जोरसँ बाज रे कौआ ठहर ने

पियर तोड़ी आम मजरल बाध गमकल
हमर बाड़ी आम जामुन सब मजर ने

फूल रहतै तखन तितली खूब पकड़ब
फूल लत्ती हमर घरपर तूँ लतर ने

काल्हि आनब घर अपन बड़का बिलैया
मूस राजा आब नै अंगा कतर ने

फाइलातुन
2122 तीन बेर सब पाँतिमे
बहरे-रमल

अमित मिश्र

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तोहर मतलब प्रेम प्रेमक मतलब जीवन आ जीवनक मतलब तों