Monday, 28 January 2013

गजल

गजल-४७

"गाँधीजी"क धरती पर बहलै शोणित केर धार कोना 
"भगत सिंह" केर आँगनमे जनमल अत्याचार कोना 

कतए गेलै "आजाद"क नगरी रूसि "लक्ष्मी" कत' पड़ेली 
देव आ विद्वानक नगरीसँ बिला रहल संस्कार कोना 

बिसरल-बिलटल छै अपनैती "मालवीय-मौलाना" के
जाति-पाति आ भेदभाव के पसरल एते विकार कोना

आब नै जनमै "लाल" किए की देशक माटि भेलै उस्सर
लोभी-कपटी-कुकर्मी सभके लागल एते पथार कोना

ने नेत ठीक ने नाम नीक टाका बल पर नेता बनलै
करै ओसूली जनता सभसँ चतरल भ्रष्टाचार कोना

मत के मान बिना बुझने बेर-बेर मतदान केलहुं
मत के मान नै बूझब जा जागत गुम सरकार कोना

छोड़ब नै अधिकार अपन फांड़ बान्हि ली चलू "नवल"
बिनु मँगने नै भीख भेटै भेटत फेर अधिकार कोना

>आखर-२१ / (तिथि: २५.०१.२०१३)
©पंकज चौधरी "नवलश्री"

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